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गुरु पूर्णिमा महोत्सव में गुरु महिमा का हुआ गुणगान, प्रतिभाओं का हुआ भव्य सम्मान
मिर्जापुर (सीखड़)। पचरांव गांव स्थित महर्षि ऋष्यऋग सेवा संस्थान (पंजीकृत) एवं नारायण गृहस्थ आश्रम, नारायण नगर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गढ़ मुक्तेश्वर पीठ के पीठाधीश्वर जलेश्वरानंद गिरी तथा प्रयागराज पीठ के जगद्गुरु रामानुजाचार्य हरिप्रपन्नाचार्य (हरिहरानंद) के चित्रों पर माल्यार्पण एवं वैदिक विधि से पूजन-अर्चन कर किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारों, साहित्यकारों तथा मेधावी विद्यार्थियों को "नारायण की कलम सम्मान" से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता भास्करानंद द्विवेदी ने सभी सम्मानित अतिथियों को अंगवस्त्र, पेन एवं सुंदरकांड की पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया। आश्रम के प्रबंधक इंजीनियर वीरेंद्र कुमार सिंह 'बिचित्रानंद' ने कहा कि मानव जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और आत्मबोध के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जीवन में ऐसे सद्गुरुओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिन्होंने भौतिक विज्ञान और आध्यात्मिक विज्ञान दोनों का समन्वित ज्ञान प्रदान किया। उनका मानना है कि गृहस्थ जीवन जीने वाले व्यक्ति को गृहस्थ आश्रम में रहने वाले योग्य गुरु से ही दीक्षा लेनी चाहिए, क्योंकि गुरु के बिना न भोग की प्राप्ति संभव है और न ही मोक्ष की। वरिष्ठ अधिवक्ता भास्करानंद द्विवेदी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम ही जीवन की सबसे श्रेष्ठ व्यवस्था है। परिवार और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए यदि व्यक्ति ईश्वर का स्मरण करता रहे तो वही सच्चा आध्यात्मिक जीवन है। बिचित्रानंद ने कहा कि गुरु परंपरा उन्हें विरासत में मिली है। उनके पूर्वजों ने गुरु-शिष्य परंपरा को जीवनभर आत्मसात किया और उसी आदर्श को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने अपने पिता की स्मृति में आश्रम की स्थापना की। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, "राही मनवा, दुःख की चिंता क्यों सताती है, दुःख तो अपना साथी है।" साथ ही उन्होंने जीवन की क्षणभंगुरता का उल्लेख करते हुए कहा, "सांसों का क्या भरोसा, रुक जाए चलते-चलते।" कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए गुरु के नाम रुद्राक्ष तथा माता के नाम चंदन और आम का पौधा रोपित किया गया। इस अवसर पर पत्रकार यासीन खान, अमित सिंह, शाहिद आलम, सुनील मौर्य सहित कई साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। वहीं मेधावी छात्र सौरभ त्रिपाठी को भी "नारायण की कलम सम्मान" से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम में सुशील तिवारी, जयप्रकाश तिवारी, संजय मिश्रा, शिव कुमार पांडेय, बासुदेव सिंह, शराफत अली, ए.के. सिंह, सुनील मौर्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में संस्थान की अध्यक्ष सबिता सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

